تیرے پھولوں کی ادا شاہین باغ یاد رکھیں گے سدا شاہین باغ

حضرت علامہ مفتی محمد فیصل رضا صالح صاحب مرکزی
استاد مرکز الدراسات الاسلامیہ جامعۃ الرضا متھرا پور بریلی شریف یوپی

تیرے پھولوں کی  ادا  شاہین  باغ
یاد  رکھیں گے   سدا   شاہین باغ

حریت کا لیکے  ہاتھوں  میں علم
آگئے      اہل      وفا    شاہین باغ

گلستان  ہند   کو      مہکائے   گی
تیرے  دامن  کی ہوا    شاہین باغ

ظلم   کی  تاریکیوں   پر  وار  ہے
تیرے  سورج کی ضیا شاہین باغ

دیکھنا   ظالم   حکومت   کے  لئے
زلزلہ   بن   جائے   گا    شاہین باغ

ہر کلی ہر گل خزاں کی زد میں ہے
پھر  بھی  ہے مہکا ہوا شاہین باغ

ہے    طمانچہ  حاکمان    وقت   پر
جامعہ    اسلامیہ         شاہین  باغ

جامعہ   کے  شاہزادوں  کے   طفیل
حوصلوں  کی  ہے  گھٹا شاہین باغ

وقت  کی  با حوصلہ    شہزادیو
ہے نشیمن  آپ کا     شاہین   باغ

شہسواران   شجاعت     کے    لئے
گھر  کے  جیسا  بن  گیا شاہین باغ

ان کی ہمت ان کی جرات کو سلام
جو  رہیں  صبح و مسا   شاہین باغ

آ   نہ   جا نا   زد  میں   غدار وطن
رہ میں ہے بیٹھا ہوا  شاہین باغ

فتح  و  نصرت  تو خدا کے ہاتھ ہے
کر  رہا   ہے   بس   دعا   شاہین باغ

انقلابی   ہند    کی     تاریخ    میں
تذکرہ     ہوگا      ترا    شاہین   باغ

شعر  کہنے تھے  جو فیصل  کہ لئے
تم  بھی اب چل دو ذرا  شاہین باغ

@Barelvi_Network

حضرت مولانا مفتی محمد فیصل رضا صالح استاذ جامعۃ الرضا بریلی شریف کا لکھا ہوا کلام ہندی میں پیش خدمت ہے 

तेरे फूलों की अदा शाहीन बाग 
याद रखेंगे सदा शाहीन बाग 

हुर्रियत का लेके हाथों में अलम 
आ गए अहले वफा शाहीन बाग 

गुलसिताने हिंद को महकाएगी 
तेरे दामन की हवा शाहीन बाग 

जुल्म की तारीकियो पर वार है 
तेरे सूरज की जिया शाहीन बाग

देखना जालिम हुकूमत के लिए 
जलजला बन जाएगा शाहीन बाग 

हर कली हर गुल फिजा की जद में है 
फिर भी है महका हुआ शाहीन बाग 

है तमाचा हाकिमाने वक्त पर 
जामिया इस्लामिया शाहीन बाग

जामिया के शाहज़ादो के तूफेल 
हौसलों की है घटा शाहीन बाग

वक्त की बा हौसला शहजादियो
 है नशेमन आपका शाहीन बाग 

शहसवाराने शुजाअत के लिए
 घर के जैसा बन गया शाहीन बाग

उनकी हिम्मत उनकी जुररत को सलाम 
जो रहे सुबह मसा शाहीन बाग 

आ ना जाना जद में गद्दार ए वतन
रह में है बैठा हुआ शाहीन बाग

फतह ओ नुसरत तो खुदा के हाथ है 
कर रहा है बस दुआ शाहीन बाग 

इंकलाब ए हिंद की तारीख में 
तजकिरा होगा तेरा शाहीन बाग 

शेर कहने थे जो फैसल कह लिए 
तुम भी अब चल दो जरा शाहीन बाग


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